दोपहर का वक्त है। आप दुकान के काउंटर पर एक ग्राहक को सामान दिखा रहे हैं, या किसी के घर में पाइप ठीक कर रहे हैं, या क्लिनिक में मरीज़ के साथ हैं। जेब में फ़ोन बजता है और आप चाहकर भी नहीं उठा पाते। शाम को देखते हैं तो तीन मिस्ड कॉल हैं, और उनमें से दो नंबर दोबारा फ़ोन नहीं उठाते। हो सकता है वे किसी और से काम करवा चुके हों।
यहीं पर कॉल फॉरवर्डिंग काम आता है। सीधे शब्दों में, कॉल फॉरवर्डिंग क्या होता है? यह आपके फ़ोन की वह सुविधा है जिससे आपके नंबर पर आने वाली कॉल अपने-आप किसी दूसरे नंबर पर चली जाती है। वह दूसरा नंबर आपके साथी का हो सकता है, आपकी दुकान के लैंडलाइन का, या किसी ऐसी सेवा का जो आपकी तरफ़ से कॉल उठाती है। कॉल करने वाले को कुछ अलग नहीं करना पड़ता, वह आपका वही पुराना नंबर डायल करता है।
इस लेख में हम बताएँगे कि कॉल फॉरवर्डिंग के कौन-कौन से प्रकार होते हैं, इसे कैसे चालू और बंद करें, छोटे बिज़नेस इसे किस तरह इस्तेमाल करें, और किन गलतियों से बचना चाहिए।
कॉल फॉरवर्डिंग क्या होता है, आसान शब्दों में
इसे डाकघर के पता बदलने वाले इंतज़ाम की तरह समझिए। आप घर बदलते हैं तो डाकघर को बता देते हैं कि अब चिट्ठियाँ नए पते पर भेजो। भेजने वाला पुराना पता ही लिखता है, फिर भी चिट्ठी आप तक पहुँचती है। कॉल फॉरवर्डिंग में आपकी मोबाइल कंपनी (ऑपरेटर) यही काम कॉल के साथ करती है।
बोलचाल में इसे कॉल डाइवर्ट या कॉल डायवर्ज़न भी कहते हैं। ज़्यादातर मोबाइल और कई लैंडलाइन कनेक्शन में यह सुविधा पहले से मौजूद होती है, बस इसे चालू करना होता है। कुछ ऑपरेटर इसके लिए अलग शुल्क लेते हैं, कुछ प्लान में यह शामिल रहता है, इसलिए अपने ऑपरेटर से एक बार ज़रूर पूछ लें।
एक बात ध्यान रखें: आम तौर पर जब कॉल आगे भेजी जाती है, तो आगे वाले हिस्से का खर्च उस नंबर पर पड़ सकता है जिसने फॉरवर्डिंग चालू की है, यानी आप पर। यह भी प्लान और ऑपरेटर के हिसाब से अलग होता है।
कॉल फॉरवर्डिंग के चार मुख्य प्रकार
हर स्थिति में सारी कॉल आगे भेजना ज़रूरी नहीं। फ़ोन आपको चुनने देता है कि कॉल कब फॉरवर्ड हो।
1. हमेशा फॉरवर्ड (बिना शर्त)
आपके नंबर पर आने वाली हर कॉल सीधे दूसरे नंबर पर जाएगी, आपका फ़ोन बजेगा ही नहीं। यह तब काम का है जब आप छुट्टी पर हों, शादी-ब्याह में हों, या किसी दिन पूरा काम किसी साथी को सौंप दिया हो।
2. बिज़ी होने पर फॉरवर्ड
आप पहले से किसी से बात कर रहे हैं और दूसरी कॉल आती है, तो वह आगे चली जाएगी। जिन दुकानों पर एक साथ कई ग्राहक फ़ोन करते हैं, जैसे सुबह के समय टिफ़िन सर्विस या दोपहर में रेस्टोरेंट, वहाँ यह बहुत काम आता है।
3. कॉल न उठाने पर फॉरवर्ड
फ़ोन कुछ देर बजेगा, अगर आपने नहीं उठाया तो कॉल आगे चली जाएगी। छोटे बिज़नेस के लिए यह सबसे उपयोगी विकल्प है, क्योंकि आप खाली हों तो खुद उठा लेते हैं, और व्यस्त हों तो ग्राहक खाली हाथ नहीं लौटता।
4. नेटवर्क न होने या फ़ोन बंद होने पर फॉरवर्ड
फ़ोन बंद है, बैटरी खत्म हो गई, या आप ऐसी जगह हैं जहाँ नेटवर्क नहीं आता, जैसे किसी बेसमेंट में काम कर रहे हों, तो कॉल आगे चली जाएगी।
ज़्यादातर बिज़नेस के लिए आखिरी तीनों को एक साथ चालू करना सबसे समझदारी भरा तरीका होता है।
छूटी हुई कॉल आपको कितनी महंगी पड़ती है
किसी छोटे बिज़नेस के लिए हर कॉल एक संभावित ग्राहक होती है। जो व्यक्ति प्लंबर, डॉक्टर, कैटरर या होटल को फ़ोन करता है, उसे आम तौर पर अभी काम चाहिए। अगर फ़ोन नहीं उठा, तो उसके पास और भी नंबर होते हैं।
नुकसान सिर्फ़ उस एक काम का नहीं होता। वह ग्राहक शायद अगली बार भी आपको फ़ोन न करे, और किसी दोस्त को आपका नाम भी न बताए। ऊपर से, शाम को बैठकर मिस्ड कॉल पर वापस फ़ोन करना अपने आप में एक काम बन जाता है, जिसमें आधे लोग उठाते ही नहीं।
कॉल फॉरवर्डिंग यह पक्का करता है कि कॉल किसी न किसी तक पहुँचे। पर ध्यान दें, यह सिर्फ़ कॉल को रास्ता दिखाता है। आगे वाले नंबर पर भी कोई उठाने वाला होना चाहिए, वरना आपने मिस्ड कॉल को बस एक फ़ोन से दूसरे फ़ोन पर खिसका दिया।
एक दिन का उदाहरण: AC मरम्मत का छोटा कारोबार
मान लीजिए लखनऊ में एक कारीगर AC लगाने और ठीक करने का काम करते हैं। गर्मियों में फ़ोन लगातार बजता है, और वे दिन भर ग्राहकों के घरों में रहते हैं।
- सुबह 9:00 बजे: वे निकलने से पहले अपने फ़ोन पर बिज़ी होने पर, न उठाने पर और नेटवर्क न होने पर फॉरवर्डिंग चालू रखते हैं। कॉल उनके दफ़्तर में बैठने वाले भाई के नंबर पर जाती हैं।
- सुबह 11:30 बजे: वे छत पर आउटडोर यूनिट ठीक कर रहे हैं, हाथ खाली नहीं। एक नई ग्राहक फ़ोन करती हैं। तीन-चार घंटी के बाद कॉल भाई के पास जाती है, वे नाम, पता और समस्या लिख लेते हैं और शाम चार बजे का समय दे देते हैं।
- दोपहर 2:00 बजे: भाई खुद खाना खाने गए हैं। अब कॉल उनके फ़ोन पर भी नहीं उठती। यही इंसानी इंतज़ाम की कमज़ोरी है: आगे वाला व्यक्ति भी हमेशा उपलब्ध नहीं रहता।
- रात 9:30 बजे: एक पुराने ग्राहक का AC बंद हो गया है। दफ़्तर बंद है, कारीगर थके हुए हैं। कॉल किसी के पास नहीं पहुँचती।
इस दिन ने दिखाया कि फॉरवर्डिंग ने एक ग्राहक बचा लिया, पर दो कॉल फिर भी हाथ से निकल गईं। ऐसी स्थिति में कई बिज़नेस फॉरवर्डिंग को किसी ऐसी सेवा से जोड़ते हैं जो हर समय कॉल उठा सके, जैसे Ringhum जैसा AI फ़ोन रिसेप्शनिस्ट, जो कॉल लेकर संदेश या बुकिंग दर्ज कर सकता है। कारीगरों और मरम्मत का काम करने वालों के लिए इसका तरीका यहाँ समझाया गया है।
कॉल फॉरवर्डिंग कैसे चालू करें: चरण-दर-चरण
तरीका फ़ोन और ऑपरेटर के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकता है, पर आम तौर पर यह काम करता है:
- आगे वाला नंबर तय करें। किसके पास कॉल जाएँगी, साथी, लैंडलाइन या कोई कॉल उठाने वाली सेवा। उस व्यक्ति को पहले से बता दें।
- फ़ोन की सेटिंग खोलें। ज़्यादातर एंड्रॉइड फ़ोन में फ़ोन ऐप में जाकर सेटिंग, फिर कॉल या सप्लीमेंट्री सर्विसेज़ में कॉल फॉरवर्डिंग मिलता है। आईफ़ोन में सेटिंग के अंदर फ़ोन वाले हिस्से में यह विकल्प होता है।
- डुअल सिम है तो सही सिम चुनें। जिस नंबर पर ग्राहक फ़ोन करते हैं, फॉरवर्डिंग उसी सिम पर चालू करें।
- प्रकार चुनें और नंबर डालें। हमेशा, बिज़ी होने पर, न उठाने पर या नेटवर्क न होने पर, जो चाहिए वह चुनें।
- या डायल कोड इस्तेमाल करें। कई नेटवर्क पर ये मानक कोड काम करते हैं (नंबर की जगह आगे वाला नंबर लिखें):
- हमेशा फॉरवर्ड:
**21*नंबर# - बिज़ी होने पर:
**67*नंबर# - न उठाने पर:
**61*नंबर# - नेटवर्क न होने पर:
**62*नंबर# - सारी फॉरवर्डिंग बंद करने के लिए:
##002#
- हमेशा फॉरवर्ड:
- जाँच करें। किसी दूसरे फ़ोन से अपने नंबर पर कॉल करके देखें कि कॉल सही जगह पहुँच रही है।
- खर्च की पुष्टि करें। अपने ऑपरेटर से पूछ लें कि फॉरवर्ड हुई कॉल पर आपके प्लान में कोई शुल्क लगता है या नहीं।
अगर कोड काम न करे, तो हो सकता है आपका ऑपरेटर इसे अलग तरीके से चलाता हो। ऐसे में ग्राहक सेवा से पूछना सबसे तेज़ रास्ता है।
कॉल फॉरवर्डिंग में आम गलतियाँ जिनसे बचें
- फॉरवर्डिंग चालू करके भूल जाना। छुट्टी से लौटकर हमेशा फॉरवर्ड वाला विकल्प बंद करना न भूलें, वरना आपका फ़ोन बजेगा ही नहीं और आपको पता भी नहीं चलेगा।
- आगे वाले व्यक्ति को न बताना। अचानक किसी के फ़ोन पर आपके ग्राहकों की कॉल आने लगें, तो वह उन्हें अनजान नंबर समझकर काट सकता है।
- ऐसे नंबर पर फॉरवर्ड करना जो खुद भी व्यस्त रहता है। इससे समस्या बस आगे खिसक जाती है।
- दो फ़ोन को एक-दूसरे पर फॉरवर्ड कर देना। इससे कॉल गोल-गोल घूमकर कहीं नहीं पहुँचती।
- बिना लिखे कॉल लेना। जिसके पास कॉल जाती है, उसके पास नाम, नंबर और काम लिखने का कोई तय तरीका होना चाहिए, वरना जानकारी खो जाती है।
कब कॉल किसी इंसान को ही लेनी चाहिए
फॉरवर्डिंग और कॉल उठाने वाली सेवाएँ रोज़मर्रा की कॉल के लिए बढ़िया हैं: समय पूछना, अपॉइंटमेंट बुक करना, ऑर्डर लेना, संदेश छोड़ना। पर कुछ कॉल ऐसी होती हैं जहाँ किसी जानकार इंसान का होना ज़रूरी है:
- आपातकाल, जैसे गैस लीक, बिजली का खतरा या मरीज़ की गंभीर हालत।
- नाराज़ या परेशान ग्राहक, जिसकी शिकायत सुनकर तुरंत फ़ैसला लेना हो।
- पैसों का लेन-देन, बड़ा सौदा या मोलभाव।
- कोई ऐसी तकनीकी या कानूनी बात जिसमें गलत जवाब नुकसान कर सकता है।
अच्छा इंतज़ाम वह है जिसमें ऐसी कॉल तुरंत आप तक या किसी ज़िम्मेदार व्यक्ति तक पहुँचें, और बाकी कॉल कोई और संभाल ले।
निष्कर्ष: आज ही क्या करें
कॉल फॉरवर्डिंग एक छोटी-सी सेटिंग है, पर यह तय करती है कि आपके व्यस्त होने पर ग्राहक की कॉल कहाँ जाएगी। आज ही ये तीन काम करें: तय करें कि आगे कॉल कौन उठाएगा, अपने बिज़नेस नंबर पर बिज़ी, न उठाने और नेटवर्क न होने वाली फॉरवर्डिंग चालू करें, और एक टेस्ट कॉल करके देख लें। फिर एक हफ़्ते तक ध्यान दें कि कौन-सी कॉल अब भी छूट रही हैं, खासकर दोपहर और रात की। वहीं से पता चलेगा कि आपको किसी साथी की ज़रूरत है या चौबीसों घंटे कॉल उठाने वाले इंतज़ाम की।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कॉल फॉरवर्डिंग के पैसे लगते हैं?
यह आपके ऑपरेटर और प्लान पर निर्भर करता है। कई प्लान में सुविधा मुफ़्त होती है, लेकिन फॉरवर्ड हुई कॉल का आगे वाला हिस्सा आपके खाते से आउटगोइंग कॉल की तरह कट सकता है। अनलिमिटेड कॉलिंग वाले प्लान में अक्सर यह अलग से महसूस नहीं होता, फिर भी एक बार ऑपरेटर से पुष्टि कर लेना ही ठीक है।
कॉल फॉरवर्डिंग बंद कैसे करें?
फ़ोन की सेटिंग में जाकर कॉल फॉरवर्डिंग वाले हिस्से में हर विकल्प को बंद कर दें। ज़्यादातर नेटवर्क पर ##002# डायल करने से सारी फॉरवर्डिंग एक साथ हट जाती है। बंद करने के बाद किसी दूसरे फ़ोन से अपने नंबर पर कॉल करके देख लें कि अब घंटी आपके ही फ़ोन पर बज रही है।
क्या कॉल करने वाले को पता चलता है कि कॉल फॉरवर्ड हुई है?
आम तौर पर नहीं। कॉल करने वाला आपका ही नंबर डायल करता है और उसे बस घंटी सुनाई देती है, फिर कोई कॉल उठा लेता है। कुछ नेटवर्क पर हल्का-सा अलग संकेत सुनाई दे सकता है, पर ज़्यादातर लोगों को फ़र्क नहीं पता चलता। इसलिए आगे वाले व्यक्ति को बिज़नेस का नाम लेकर फ़ोन उठाना चाहिए।
क्या व्हाट्सऐप कॉल भी फॉरवर्ड होती हैं?
नहीं। कॉल फॉरवर्डिंग मोबाइल नेटवर्क की सुविधा है, इसलिए यह सिर्फ़ सामान्य फ़ोन कॉल पर लागू होती है। व्हाट्सऐप कॉल इंटरनेट से आती हैं और इस सेटिंग से आगे नहीं जातीं। व्हाट्सऐप पर ग्राहकों को जवाब देने के लिए अलग इंतज़ाम करना पड़ता है।
Ringhum यहाँ क्या करता है: आप अपने बिज़नेस नंबर से कॉल फॉरवर्डिंग के ज़रिए कॉल Ringhum पर भेज सकते हैं। यह दिन-रात कॉल उठाता है, अपॉइंटमेंट और ऑर्डर लेता है, संदेश दर्ज करता है और व्हाट्सऐप पर भी जवाब देता है, जबकि ज़रूरी या संवेदनशील कॉल आप तक पहुँचाने का इंतज़ाम आप खुद तय करते हैं। सेटअप से जुड़े सवालों के लिए हेल्प सेंटर देखें।